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नेतृत्व मायने रखता है: "समकालीन विश्व में महात्मा गांधी की प्रासंगिकता" ईसीओएसओसी चैंबर

सितम्बर 24, 2019

शांति और अहिंसा के वैश्विक प्रतीक महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उत्सव को मनाने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के ईसीओएसओएसी चैंबर में आज शाम 6:30 बजे 74वें यूएनजीए के परिप्रेक्ष्य में एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम की मेजबानी की।

यूएन महासचिव माननीय श्री एंटोनियो गुटेरेस, कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति माननीय श्री मून जे-इन, सिंगापुर के प्रधानमंत्री माननीय श्री ली हसिएन लूंग, बांग्लादेश गणराज्य की प्रधानमंत्री माननीया सुश्री शेख हसीना, जमैका के प्रधान मंत्री माननीय श्री एंड्रयू होल्नेस तथा न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री माननीया सुश्री जैकिंडा अर्डर्न ने कार्यक्रम को सुशोभित किया।

आयोजन में भाग लेने वाले अन्य गणमान्य व्यक्तियों में भूटान के प्रधानमंत्री माननीय श्री लोटे शेरिंग, कोरिया गणराज्य की प्रथम महिला माननीया सुश्री किम जंग-सूक, संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारीगण तथा सदस्य राज्यों के राजनयिक शामिल रहे।

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने स्वागत भाषण दिया। भाग लेने वाले गणमान्य व्यक्तियों ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में गांधी सोलर पार्क (संयुक्त राष्ट्र को भारत सरकार द्वारा योगदान) का उद्घाटन किया, ओल्ड वेस्टबरी में न्यूयॉर्क कॉलेज के स्टेट यूनिवर्सिटी में गांधी शांति उद्यान तथा संयुक्त राष्ट्र प्रशासन द्वारा लाए गए डाक टिकट गांधी@150 के विशेष स्मारक संस्करण का अनावरण किया।

पीएम मोदी ने अपने मुख्य भाषण में 20वीं शताब्दी में मानव की स्वतंत्रता में महात्मा गांधी के योगदान के बारे में बात की; जिसमें सभी (सर्वोदय) के कल्याण पर जोर; दलितों (अंत्योदय) का अगुआ; और पर्यावरणीय स्थिरता को लेकर पूर्वज्ञान जैसे विषय शामिल रहे। पीएम ने कहा कि सामूहिक इच्छा, साझा नियति, नैतिक उद्देश्य, लोगों के आंदोलनों और व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर महात्मा गांधी के विश्वास समकालीन समय के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

पीएम ने कहा कि हिंसक संघर्ष, आतंकवाद, आर्थिक असमानताएं, सामाजिक-आर्थिक क्षति, महामारी तथा जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे लोगों, राज्यों और समाजों को प्रभावित कर रहे हैं। इन मुद्दों में से किसी एक अथवा सभी का समाधान करने के लिए नेतृत्व का होना महत्वपूर्ण है और गांधी द्वारा प्रचारित मूल्य प्रबुद्ध नेतृत्व के लिए नैतिक कम्पास के रूप में काम करते हैं।

महासचिव गुटेरेस ने कहा कि गांधी ने हमें किसी नीति और वास्तव में किसी भी कार्य का निर्णय करने के लिए एक तिलिस्म दिया है - यह आकलन करने के लिए कि क्या प्रस्तावित कार्य हमसे मिले सबसे गरीब व्यक्ति के जीवन, सम्मान और भाग्य को बढ़ाएगा। एमडीजी या एसडीजी के पूर्व स्वच्छता, मातृ स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, लैंगिक संतुलन, महिला सशक्तीकरण, भूख में कमी और विकास के लिए साझेदारी सुनिश्चित करना गांधी के जीवन और अभ्यास के आधार थे। वास्तव में, सतत विकास लक्ष्य पर कार्रवाई गांधीवादी दर्शन हैं।

भाग लेने वाले नेताओं ने इस अवसर का इस्तेमाल गांधीवादी सोच को श्रद्धांजलि देने के लिए किया और कहा कि महात्मा गांधी की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए होगी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का नाम जाति, धर्म और राष्ट्र-राज्यों की सीमाओं से परे है, और वे इक्कीसवीं सदी के ईश्वरीय वाणी के रूप में उभरे हैं। गांधी एक बहुआयामी व्यक्तित्व थे। वह एक राष्ट्रवादी और एक अन्तर्राष्ट्रवादी, एक परंपरावादी और सुधारवादी, एक राजनीतिक नेता और एक आध्यात्मिक गुरु, एक लेखक, एक विचारक, एक शांतिवादी तथा सामाजिक सुधार और बदलाव के लिए समर्पित एक कार्यकर्ता थे। दुनिया महात्मा को न केवल अहिंसा और सर्वोच्च मानवतावाद के अभ्यास के लिए याद करती है, बल्कि उस मानदंड के रूप में भी, जिनके खिलाफ हम सार्वजनिक जीवन, राजनीतिक विचारों और सरकारी नीतियों में स्त्री और पुरुष को परखते हैं तथा हमारे साझा ग्रह की आशाओं और इच्छाओं की कामना करते हैं।

न्यूयॉर्क
24 सितम्बर, 2019


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