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74वें यूएनजीए विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक सीआईसीए बैठक में विदेश राज्य मंत्री श्री वी. मुरलीधरन का भाषण

सितम्बर 23, 2019

मैं सीआईसीए की इस अनौपचारिक मन्त्रिस्तरीय का आयोजन करने के लिए ताजिकिस्तान को बधाई देता हूँ। मैं ताजिकिस्तान के पश्चात अध्यक्षता करने के लिए कजाकिस्तान के इस निर्णय की सराहना करता हूँ। भारत एशिया में शान्ति, सुरक्षा तथा समृद्धि के लिए सीआईसीए की पहलों का समर्थन करता है और इसने सीआईसीए के आयोजन तथा संगठन सम्बन्धी गतिविधियों में सक्रियता से भाग लेकर अपनी प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की है। हमने 2020 में भारत में विशेष कार्यकारी समूह (एसडब्लूजी) तथा वरिष्ठ आधिकारिक समिति की बैठक तथा ऊर्जा दक्षता कार्यशाला आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है। हम लगभग एक दशक से सीआईसीए सचिवालय में प्रतिनियुक्ति के आधार पर एक प्रतिनिधि नियुक्त करते रहे हैं।

भारत के विदेशी मामले के मन्त्री ने जून 2019 में दुसांबे में अन्तिम सीआईसीए सम्मेलन में सुरक्षित एवं समृद्ध एशिया तथा अपनी सुरक्षा सम्बन्धी कुछ चिन्ताओं के प्रति भारत के दृष्टिकोण को साझा किया था। भारत विश्वास निर्माण उपायों के माध्यम से एशिया में शान्ति और विकास के प्रोत्साहन के लिए सीआईसीए द्वारा की गयी पहलों की प्रशंसा करता है। भारत एशिया तथा विश्व के शेष भागों में नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करता है। हम एशिया में अनेक चुनौतियों जैसे आतंकवाद, संघर्ष, पारदेशीय अपराध तथा समुद्री खतरों का सामना कर रहे हैं। हमारे सम्मुख ऊर्जा सुरक्षा के अभाव, निम्न अन्तरा-क्षेत्रीय व्यापार तथा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में कमी सहित अपने स्थायी विकास के लक्ष्य सम्बन्धी चुनौतियाँ भी हैं। सीआईएसए को इन चुनौतियों के प्रति हमारे प्रत्युत्तरों को ढालने की भूमिका निभानी है।

अफगानिस्तान की स्थिति चिन्ता का विषय है। अफगानिस्तान तथा क्षेत्र के दीर्घकालीन स्थायित्व के लिए एक वैधानिक लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अफगानिस्तान में स्थिति बहाल करना आवश्यक है। भारत अफगानिस्तान की सरकार तथा उसकी जनता के साथ दृढ़तापूर्वक खड़ा है और अनेक बाधाओं के बावजूद अफगानिस्तान के विकास में सहयोग किया है। भारत ने अफगानिस्तान के नेतृत्व वाली, अफगानिस्तान के स्वामित्व वाली तथा अफगानिस्तान के नियन्त्रण वाली शान्ति प्रक्रिया में लगातार सहयोग किया है।

खाड़ी क्षेत्र में भी स्थिति निरन्तर चिन्ताजनक बनी हुई है जहाँ प्रतिस्पर्द्धी भू-रणनीतिक हितों के कारण अपरिहार्य संघर्ष होने की सम्भावना है जिसके कारण इस क्षेत्र तथा इससे परे के क्षेत्र में देशों की सुरक्षा तथा विकास पर घातक प्रभाव पड़ेंगे। इस क्षेत्र का एक उत्तरदायी देश होने के कारण भारत ने व्यापार तथा जलयानों के आवागमन को निर्बाध करना सुनिश्चित करने के लिए अन्य देशों के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में अपने नौसैनिक पोत नियुक्त किये हैं। हमें आशा है कि जलयानों के आवागमन में कोई बाधा नहीं पहुँचेगी। हमें आशा है कि वार्ता तथा कूटनीति के माध्यम से हम किसी स्थिति के संघर्ष की स्थिति में बदलने से रोकने में सफल होंगे।

आतंकवाद एक अभिशाप है जो सीआईसीए के सदस्य देशों एवं अन्य देशों को आक्रान्त करता है। कुछ देशों के वित्तीय, राजनीतिक तथा नैतिक समर्थन के माध्यम से यह स्थिति बनी हुई है। आतंकवाद के वित्त पोषण को रोकने के लिए एशिया में अन्तर्राष्ट्रीय वित्त व्यवस्था की अखण्डता बनाये रखने के लिए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) जैसे संस्थान कार्यरत हैं। सीआईसीए के सदस्य देशों को एफएटीएफ के इन प्रयासों में लगातार सहयोग देना होगा। हम भारत के प्रस्ताव के अनुसार अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन के शीघ्र आयोजन हेतु आपका समर्थन भी चाहते हैं।

भारत समावेशी तथा एकमत आधारित बहुपक्षीय सहयोग का समर्थन करता है। भारत की थिंक वेस्ट, एक्ट ईस्ट, सबके लिए सुरक्षा तथा विकास और भारत-प्रशान्त के प्रति इसके दृष्टिकोण जैसी भारत की नीतियाँ 21वीं शताब्दी को एशिया की शताब्दी बनाने के लिए हमारे सामूहिक प्रयास में एशियाई देशों के साथ साझेदारी करने की हमारी प्रतिबद्धता की झलक हैं। भारत सीआईसीए की सदस्यता को महत्त्व देता है और इसे सुरक्षित तथा विकसित एशिया बनाने के लिए इसे एक महत्त्वपूर्ण मंच के रूप में देखता है।



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