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सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज पर प्रेस विज्ञप्ति

सितम्बर 23, 2019

23 सितंबर 2019 को प्रधान मंत्री, संयुक्त राष्ट्र महासभा की सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज पर पहली उच्च स्तरीय बैठक में बोले ।

2015 में राज्यों और सरकारों के प्रमुखों ने 2030 तक सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए एक साहसिक प्रतिबद्धता व्यक्त की थी, जिसमें वित्तीय जोखिम संरक्षण, गुणवत्ता-युक्त अनिवार्य स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक सभी की पहुंच और सब को सुरक्षित, प्रभावी, गुणवत्ता और सस्ती आवश्यक दवाओं और टीकों का प्राप्त होना शामिल है।

यह बैठक "सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज: एक स्वस्थ दुनिया बनाने के लिए एक साथ आगे बढ़ना” थीम के तहत आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) की दिशा में प्रगति को तेज करना है।

बैठक का उद्देश्य वैश्विक समुदाय को 2030 तक सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने की दिशा में प्रगति में तेजी लाने के लिए राज्य और सरकार के प्रमुखों से राजनीतिक प्रतिबद्धता को सुरक्षित करना है।

इस बैठक में लगभग 160 संयुक्त राष्ट्र सदस्य राज्यों के बोलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री ने अपनी टिप्पणी में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज हासिल करने के लिए भारत द्वारा उठाए गए साहसिक कदमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य का मतलब केवल बीमारियों से मुक्ति नहीं है। एक स्वस्थ जीवन हर व्यक्ति का अधिकार है। इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सरकारों की है।

उन्होंने कहा कि भारत ने इस विषय पर एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है और स्वास्थ्य सेवा के चार मुख्य स्तंभों पर काम कर रहा है:

- निवारक स्वास्थ्य देखभाल
- सस्ती स्वास्थ्य देखभाल
- आपूर्ति पक्ष में सुधार
- मिशन मोड में कार्यान्वयन

योग, आयुर्वेद और स्वास्थ्य पर विशेष जोर और 125,000 से अधिक कल्याण केन्द्रों के निर्माण ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने में मदद की है, जो जीवन शैली की बीमारियों जैसे मधुमेह, रक्तचाप, अवसाद आदि को नियंत्रित करने में मदद करता है। ई-सिगरेट पर प्रतिबंध, स्वच्छ भारत अभियान और टीकाकरण अभियानों के माध्यम से अधिक से अधिक जागरूकता ने भी स्वास्थ्य संवर्धन में योगदान दिया है।

सस्ती स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने के लिए, भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना- आयुष्मान भारत शुरू की है। इस योजना के तहत, 500 मिलियन गरीबों को सालाना 500,000 रुपये (7000 अमरीकी डॉलर से अधिक) तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई है। 5000 से अधिक विशेष फार्मेसियां हैं, जहां 800 से अधिक प्रकार की जीवनप्रद दवाएं सस्ती कीमत पर उपलब्ध हैं।

उन्होंने गुणवत्ता चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा के बुनियादी ढांचे के विकास को सुनिश्चित करने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कई ऐतिहासिक कदमों का भी उल्लेख किया।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिशन मोड के हस्तक्षेपों के बीच, राष्ट्रीय पोषण मिशन में माँ और बच्चे की पोषण की स्थिति में सुधार करना और वैश्विक लक्ष्य 2030 से पांच वर्ष पहले 2025 तक क्षय रोग को खत्म करने की प्रतिबद्धता और वायु प्रदूषण के कारण और जानवरों के माध्यम से फैलने वाली बीमारियों के खिलाफ अभियान महत्वपूर्ण हैं।

भारत के प्रयास इसकी सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। भारत ने कई अन्य देशों, विशेष रूप से अफ्रीकी देशों को टेली-मेडिसिन के माध्यम से सस्ती स्वास्थ्य देखभाल तक उनकी पहुँच बनाने में मदद की है।

न्यूयॉर्क
23 सितंबर, 2019



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