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प्रधानमंत्री की आगामी संयुक्त राज्य अमेरिका यात्रा पर विदेश सचिव द्वारा मीडिया ब्रीफिंग का प्रतिलेख (19 सितंबर, 2019)

सितम्बर 20, 2019

सरकारी प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : मित्रों नमस्‍कार, 21 सितंबर से 27 सितंबर तक प्रधानमंत्री की संयुक्त राज्य अमेरिका यात्रा के बारे में इस विशेष ब्रीफिंग में आपका स्वागत है। मेरे साथ भारत के विदेश सचिव, श्री विजय गोखले, सचिव (पश्चिम), श्री गीतेश सरमा, संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक प्रभारी संयुक्त सचिव, श्री संजय राणा, संयुक्त सचिव (अमेरिका), श्री गौरांग दास हैं। हम विदेश सचिव की प्रारंभिक टिप्पणियों के साथ शुरू करेंगे और उसके बाद हम प्रश्नों के उत्‍तर देंगे।

विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : मित्रों नमस्कार। प्रधानमंत्री 21 सितंबर की देर दोपहर से 27 सितंबर के प्रात: तक संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा करेंगे और उनके यात्रा कार्यक्रम में दो शहर टेक्सास में ह्यूस्टन और फिर न्यूयॉर्क हैं, जहां महासभा और संयुक्त राष्ट्र स्‍थित है।

इस यात्रा में तीन मुख्य स्तंभ हैं। पहले संयुक्त राष्ट्र में बहुपक्षीय संबंध, संयुक्त राज्य अमेरिका में यात्रा के द्विपक्षीय घटक राजनीतिक बैठकों में शामिल होना, व्यापार समुदाय और भारतीय प्रवासी के साथ बातचीत करना और तीसरे द्विपक्षीय बैठक में भाग लेना जो न्यूयॉर्क में विश्‍व के नेताओं के साथ होगी।

तो मैं सिर्फ कार्यक्रम की व्यापक रूपरेखा का उल्‍लेख करूंगा। प्रधानमंत्री का पहला पड़ाव ह्यूस्टन है और जैसे ही वे सीधे अपनी पहली व्यावसायिक कार्यक्रम में पहुंचेगें उनकी पहली बैठक ऊर्जा क्षेत्र में कई मुख्य अधिकारियों के साथ एक गोल मेज पर होगी जिसमें बीपी, एक्सॉन मोबिल, श्‍ल्‍मबर्गर, बेकर ह्यूजेस और ऐसी अनेक कंपनियां शामिल होगी, जिसमें बेशक भारत-अमरीका का ऊर्जा व्यापार प्रमुख नया घटक है। हम संयुक्त राज्य अमेरिका से लगभग 4 अरब डॉलर मूल्य के तेल और गैस का आयात करते हैं और प्रधानमंत्री के पास संयुक्त राज्य अमेरिका की ऊर्जा कंपनियों के साथ इस पारस्परिक संबंध को अनिवार्य रूप से न केवल यह दिखाने के लिए है कि हम एक महत्वपूर्ण बाजार हैं बल्कि निवेश पर चर्चा करने के लिए आर्थिक क्षेत्र में अन्य संभव अवसर भी है।

22 सितंबर की प्रात: भारतीय समुदाय के प्रधानमंत्री का संबोधन होगा। यह तीसरा संबोधन है जो वे संयुक्त राज्य अमेरिका में कर रहे हैं। उनका पहला संबोधन 2014 में न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में था, दूसरा 2015 में सैन जोस, कैलिफोर्निया में एसएपी सेंटर में। यह तीसरा है जहाँ हम 50 हजार से अधिक प्रवासी लोगों की आशा कर रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका का यह आयोजन काफी बड़ा है और हमें खुशी है कि इस कार्यक्रम में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प, संयुक्त राज्य अमेरिका का वरिष्ठ लोकतांत्रिक नेतृत्व भी इसमें होगा। इसमें दोनों दलों से कई निर्वाचित कांग्रेस के प्रतिनिधि भी शामिल होगें और मुझे लगता है कि उनकी उपस्थिति वहाँ उच्च और संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवासी भारतीयों के प्रभाव का समर्थन है कि भारत-अमेरिका संबंध राजनीति में आनंद मिलता है को दर्शाता है।

इस सामुदायिक कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों के साथ अलग से बातचीत करेंगे। उसके बाद वे न्यूयॉर्क के लिए रवाना हो जाएगे।

23 तारीख को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा आयोजित जलवायु शिखर सम्मेलन के साथ-साथ शुरू होने वाले अनेक बहुपक्षीय कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम की शुरूआत करेगें और इस अवसरपर वे जलवायु परिवर्ततन पर भारत द्वारा उठाए गए कदमों, अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय से हमारी अपेक्षाओं और आकांशाओं का भी उल्‍लेख करेगें। इस कार्यक्रम के बाद एक अन्‍य कार्यक्रम है जिसकी मेजबानी संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव करेगें जो स्वास्थ्य देखभाल पर है। भारत सरकार का आयुष्‍मान भारत विश्‍व की सबसे बड़ी स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल पहल है और प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम में इस पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

23 सितंबर को तीसरा कार्यक्रम आतंकवादियों और हिंसक चरमपंथियों को रणनीतिक उत्‍तर देने पर राजनेताओं की चर्चा है। इस वार्ता में संयुक्त रूप से महामहिम, जॉर्डन के राजा, न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री, फ्रांस के राष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र महासचिव और प्रधानमंत्री द्वारा इस कार्यक्रम में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया है। अन्य वक्ताओं में अन्य राष्ट्राध्यक्ष और बहुत चुनिंदा सरकार हैं जिन्हें भी आमंत्रित किया गया है और इनमें केन्या और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति, यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री, जर्मनी के कुलाधिपति आदि शामिल हैं। यह एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, इसलिए 23 तारीख को तीन कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं जिसमें प्रधानमंत्री बहुपक्षीय प्रारूप में भाग लेंगे।

24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव द्वारा दोपहर का भोजन आयोजित किया जाएगा और दोपहर में हम संयुक्त राष्ट्र में महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में अपने कार्यक्रम का आयोजन करेंगे। इस घटना का शीर्षक है, 'नेतृत्व मामले - समकालीन समय में गांधी की प्रासंगिकता' और हमें खुशी है कि प्रधानमंत्री कुछ राष्ट्राध्यक्षों और सरकार के साथ शामिल होंगे जो अपने देशों में भी गांधी की प्रासंगिकता को समकालीन रूप से व्यक्त करेंगे। बार. इनमें कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति, सिंगापुर के प्रधानमंत्री, न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री और जमैका के प्रधानमंत्री के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र महासचिव श्री गटर शामिल हैं।

इस कार्यक्रममें तीन प्रक्षेपण के रूप में अच्छी तरह से किये जा रहे हैं। पहला है गांधी सौर पार्क जो संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की छत पर 1 मिलियन डॉलर के अनुदान से सौर पैनल की स्थापना करना है जिसे भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा प्रदान की है और सौर ऊर्जा के उपयोग के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को प्रशस्‍त किया है।

दूसरा, ओल्ड वेस्टबरी में न्यूयॉर्क कैम्पस के स्टेट यूनिवर्सिटी में गांधी पीस गार्डन का दूरस्थ उद्घाटन है, जहां गांधी जी की 150वीं जयंती के सम्मान में 150 पेड़ लगाए गए हैं और तीसरा है गांधी जी पर संयुक्त राष्ट्र डाक टिकट जारी करना। उस दिन अंतिम कार्यक्रम बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, 'ग्लोबल गोलकीपर का लक्ष्य' पुरस्कार द्वितीय पुरस्कार प्रदान करना है। यह कार्यक्रम लिंकन सेंटर ऑफ पर फोर्मिंग आट में है। हर साल एक विशिष्ट एसडीजी (सतत विकास लक्ष्य) में उपलब्धि के लिए एक विश्व नेता को यह पुरस्‍कार दिया जाता है और पिछले विजेताओं में नॉर्वे के प्रधानमंत्री सोलबर्ग और लाइबेरिया के राष्ट्रपति सिरलीफ जॉनसन है। गेट्स फाउंडेशन इस वर्ष स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता के क्षेत्र में प्रधानमंत्री को उनके नेतृत्व के लिए सम्मानित कर रहा है।

25 सितंबर का कार्यक्रम प्रात: ब्लूमबर्ग ग्लोबल बिजनेस फोरम के उद्घाटन में मुख्य भाषण के साथ शुरू होता है जिसके बाद प्रधानमंत्री श्री ब्लूमबर्ग के साथ बातचीत करेंगे और यह एक निवेश दौर कार्यक्रम है जिसका आयोजन हम कर रहे हैं अर्थात भारत सरकार और निवेश भारत एक साथ, जिसमें 40 बड़ी कंपनियां जेपी मॉर्गन, लॉकहीड मार्टिन, अमेरिकन टॉवर कॉरपोरेशन, बैंक ऑफ अमेरिका, मास्टरकार्ड, वालमार्ट आदि कंपनियों सहित मौजूद रहेंगी। इसका उद्देश्य भारत में अपनी व्यावसायिक योजनाओं के बारे में उद्योग से प्रतिक्रिया प्राप्त करना और भारत में निवेश को आकर्षित करने में सरकार के व्यापार अनुकूल दृष्टिकोण को प्रदर्शित करना है।

27 सितंबर को प्रधानमंत्री महासभा को संबोधित करेंगे। यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री 2014 के बाद उच्‍च स्‍तरीय खंड में महासभा को संबोधित करेंगे। 2015 में उनकी न्यूयॉर्क की यात्रा की थी, लेकिन वह उच्च स्तरीय वार्ता नहीं थी। वह एसडीजी लक्ष्यों के उन्‍मोचन के लिए थी। इन बहुपक्षीय बैठकों के अलावा प्रधानमंत्री सभी महाद्वीपों के नेताओं के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। वे दो महत्वपूर्ण पीएलरी-पक्षीय नेताओं की बैठकों की सह-अध्यक्षता करेंगे, जिन्हें प्रधानमंत्री महत्व देते हैं। पहली 24 तारीख को है। यह भारत प्रशांत द्वीप देशों के 12 राजनेताओं की बैठक है। अगले दिन अर्थात् 25 वीं भारत कैरीकॉम नेताओं की बैठक। इसमें कैरेबियन समुदाय के 14 सदस्य हैं इसलिए वह भाग लेने वाले देशों के प्रतिनिधिमंडल के 24 प्रमुखों के साथ बहुपक्षीय वार्ता होगी और वह भी, इस समय, जबकि 20 अन्य राजनेता की द्विपक्षीय बैठक में भाग लेने की मंशा है। राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ बैठक भी शामिल है। इन बैठकों के विवरण इस समय साझा नहीं किया जा रहा है क्योंकि कार्यक्रम अभी बन रहा है, लेकिन हम न्यूयॉर्क में बैठकों के बाद नियमित रूप से ब्रीफिंग देगें। प्रधानमंत्री की बैठकों के अलावा विदेश मंत्री भी न्यूयॉर्क में होंगे और उनके भी अलग कार्यक्रम है जहां वे विदेश मंत्रियों के साथ कई बैठकें करेंगे। विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री भी अपनी बैठकों के साथ-साथ गुट निरपेक्ष, राष्ट्रमंडल, सीआईसीए और ब्रिक्स जैसे समूहों को शामिल करने के लिए न्यूयॉर्क में होंगे। अत इसका उद्देश्य वास्तव में यह सुनिश्चित करना है कि प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और राज्य मंत्री के तीन या चार दिन न्‍यूयार्क में रहते हुए संयुक्‍त राष्‍ट्र की सदस्‍यता के लिए व्‍यापक आधार बनाया जाए।

सरकार के पुनर्निर्वाचन के बाद प्रधानमंत्री की यह पहली अमरीका यात्रा है और प्रधानमंत्री सतत विकास लक्ष्यों में पिछले पांच वर्षों में ठोस उपलब्धियों के साथ संयुक्त राष्ट्र महासभा में जा रहे हैं। इसलिए इस बहु-पक्षीय मंच में इस वर्ष भाग लेने में हमारा मंशा है कि हम जलवायु परिवर्तन, वैश्‍विक स्वास्थ्य देखभाल, अक्षय ऊर्जा, स्वच्छता और इनसे संबंधित मुद्दों में की गई प्रगति का प्रदर्शन करे। जैसाकि मैंने कहा है कि अन्‍य देशों से उनकी आकांक्षाओं को समझने और आशाओं को व्‍यक्‍त करने के लिए।

लेकिन हमें जो कुछ भी लगता है कि हम एसडीजी में हासिल किया है। प्रधानमंत्री का भी यह मत है कि यह भी महत्वपूर्ण है कि इन मुद्दों में से कई पर वैश्विक एजेंडा को आकार देने में भारत की आकांक्षा है और यह अपनी राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक दोनो क्षेत्रों में भूमिका निभा रहा है। और इस संदर्भ में प्रधानमंत्री पुन इस स्थिति को दोहराएंगे कि भारत विगत कुछ समय से कहता रहा है और यह कि बहुपक्षीयता वैश्विक राजनीति के केंद्र में है और ऐसा ही रहना चाहिए लेकिन इसमें सुधारपूर्ण बहुपक्षीयता होनी चाहिए।

अर्धशताब्‍दी अथवा उससे अधिक में निर्धारित की गई व्‍यवस्‍था को 21 वीं सदी में स्थायी नहीं किया जा सकता और इसलिए बहुपक्षीय प्रणाली है जो सुधार किया है, जो नई वास्तविकता को दर्शाता है, जो इस तथ्य को दर्शाता है कि विश्‍व में भारत की जनसंख्या1/7 है, जो दर्शाती है कि कई देश जो 1945 में स्वतंत्र नहीं थे, आज पहले की तुलना में एक बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, इन्हें परिलक्षित किया जाना चाहिए और प्रधानमंत्री की यही मंशा उनकी सभी बैठकों में होगी, दोनों बहुपक्षीय और द्विपक्षीय।

दक्षिण-दक्षिण भागीदारी विशेष रूप से छोटे द्वीप विकास राज्यों के साथ महत्वपूर्ण है, ये जलवायु परिवर्तन के मामले में कमजोर हैं। हम उनके साथ द्विपक्षीय रूप से कई गतिविधियां कर रहे हैं। यह बहुपक्षीय रूप से इस प्रदर्शन का अवसर है। हम सरकार द्वारा की जाने वाली एक नई पहल की भी घोषणा करेंगे। यह आपदा लचीला बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन है। यह एक आभासी नेटवर्क है कि भारत सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पहल कर रही है कि हमारे पास अनुभव, प्रौद्योगिकी वाले देशों का एक समूह है, प्राकृतिक आपदा के बाद इन देशों में बुनियादी ढांचा बेहतर बनाने में देशों की मदद करने की वित्तीय क्षमता है। आम तौर पर यह महसूस किया जाता है कि इस क्षेत्र में एक कमी है क्योंकि जब देश बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में बहुत कम राहत प्रदान करते हैं। प्रधानमंत्री का मानना है कि भारत को इस मामले में आगे ले जाना चाहिए क्योंकि हमारे पास इस क्षेत्र में कुछ विशेषज्ञता और क्षमता है और हमारे पास इस गठबंधन का निर्माण करने के लिए अन्य देशों को आकषत करने के साधन भी है।

जाहिर है कि प्रधानमंत्री 21 वीं सदी में गांधी जी की वैश्विक प्रासंगिकता, उनके संदेश की सार्वभौमिकता और द्विपक्षीय बैठकों में सभी महाद्वीपों को शामिल किया जाएगा जिसमें हमारे पड़ोस से सभी क्षेत्रों, बिल्‍कुल पड़ोसी होगें और प्रधानमंत्री अनेक पड़ोसियों के साथ ही दूर के लैटिन अमेरिका से भी मिलेगें। संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कई हितधारकों के साथ बैठक है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ, कांग्रेस के नेताओं के साथ, व्यापार जगत के नेताओं के साथ और भारतीय समुदाय के साथ बैठकें शामिल हैं। प्रधानमंत्री के न्यूयॉर्क रवाना होने के बाद विदेश मंत्री अमरीका से मिलने और वहां के विभिन्न राजनीतिक और आर्थिक आंकड़ों के साथ मिलने के लिए वाशिंगटन डीसी की यात्रा पूर्ण होने पर वापस लौटेंगे।

प्रधानमंत्री 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने के तुरंत बाद न्यूयॉर्क से रवाना होंगे। संक्षेप में महिलाओं और सज्जनों यह व्यापक कार्यक्रम और दृष्टिकोण है जो सरकार प्रधानमंत्री द्वारा इस यात्रा में कर रही है। इस संबंध में किसी भी प्रश्‍न का उत्‍तर देने में मुझे खुशी होगी। धन्यवाद।

सरकारी प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : बहुत बहुत धन्यवाद महोदय। छोटा सुझाव है। कृपया यह न पूछें कि क्या प्रधानमंत्री इस नेता से मिलगें या उस नेता से मिलगें। इस पर प्रतिक्रिया लगभग एक ही होगी। इसलिए कृपया इस पर अपना प्रश्न करके समय बर्बाद न करें।

प्रश्न : क्या आप अमेरिका के साथ व्यापार के मुद्दों को आगे बढ़ाएगें क्योंकि टैरिफ मुद्दा वहाँ था और मैं समझता हूँ कि इस तथ्य के बावजूद कि दो वस्‍तुओं इस्पात और एल्यूमीनियम पर टैरिफ लगाने के बाद भी हम और अधिक एल्यूमीनियम का निर्यात करने में सक्षम थे।

प्रश्न : जो मौजूदा परिस्‍थितियां है खासकर हमारे क्षेत्र में आतकंवाद को लेकर इससे पहले भी प्रधान मंत्री उस पर बातचीत करते रहें हैं कि एक सम्‍मलेन दुनियां के तमाम देशों के आतकंवाद को लेकर होना चाहिए। और जो आतंकवाद का मुद्दा है पाकिस्‍तान की तरफ से आतंकवाद जो बढ़ाया जा रहा है उसका मुद्दा है, इसको कितनी तवज्जो प्रधानमंत्री अपने दौरे में देगें, संयुक्‍त राष्‍ट्र आम सभा से लेकर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संलिप्‍त में ये एजेंडा कितना शामिल होगा और किस तरह से शामिल होगा?

प्रश्न : सऊदी अरब और अमरीका ने ईरान पर हमले के लिए ईरान को दोषी ठहराया है। आपने ईरान का भी दौरा किया है, यह एक ऐसा मुद्दा है जो शायद तब पता चलेगा जब प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात होगी। भारत की स्थिति क्या होगी, क्या हम इस हमले की उत्पत्ति से, अमेरिका के रुख का समर्थन करेंगे?

विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : जहां तक न्यूयॉर्क में नेताओं के बीच विचार-विमर्श का संबंध है, मैं स्पष्ट रूप से परिणाम का पूर्वनिर्णय नहीं कर सकता। आप जानते हैं कि ओसाका में पिछली बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार मुद्दों सहित कई मुद्दों पर चर्चा की थी और यह उन मुद्दों में से एक है जिस पर आगे चर्चा होनी चाहिए और जो दोनों पक्षों की समस्‍याओं का समाधान करता है। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह चर्चा होगी लेकिन अंतिम परिणाम के रूप में हमें इंतजार करना होगा।

जहां तक आतंकवाद की बाद आती है पहले तो अनुच्‍छेद 370 का मुद्दा तो एक आंतरिक मुद्दा है। तो इस पर संयुक्‍त राष्‍ट्र में चर्चा नहीं होगी और हम चर्चा नहीं करेगें। दूसरी बात यह है कि प्रधानमंत्री इस बार जब संयुक्‍त राष्‍ट्र जा रहे हैं तो हमारे बहुत सारे मुद्दें हैं, विकास के मु्द्दें हैं, जलवायु परिवर्तन के मुद्दें हैं, और भी द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दें हैं। उनमें से एक मुद्दा जरूर आतंकवाद का है लेकिन इस पर ध्‍यान केंद्रित नहीं रहेगा। ध्‍यान इस पर केंद्रित रहेगा कि भारत इस अंतर्राष्‍ट्रीय मंच पर हमारा क्‍या किरदार हो सकता है, क्‍या भूमिका हो सकती है और प्रधानमंत्री इस मामले में अपना दृष्‍टिकोण प्रस्‍तुत करेगें। मुझे लगता है कि सरकारी प्रवक्ता पहले ही सऊदी अरब में तेल रिफाइनरी पर हमले पर अपनी स्थिति व्यक्त कर चुके हैं। मेरे पास इस मामले पर कोई और टिप्पणी करने के लिए नहीं है।

प्रश्न : क्या ऊर्जा गोल मेज चर्चा में परमाणु ऊर्जा पर बातचीत होगी और अमेरिकी कंपनियों द्वारा भारत में बनाए जाने वाले छठे परमाणु ऊर्जा रिएक्टर के लिए वार्ता की स्थिति क्या है?

प्रश्न : जीएसपी के मुद्दे पर 44 अमेरिकी कांग्रेसियों द्वारा हाल ही में लिखा गया पत्र जिसमें वार्ता में प्रगति के अधीन जीएसपी की मूल रूप से आंशिक बहाली के बारे में पूछा गया था, लेकिन जब जीएसपी की घोषणा की गई थी, तो भारत से जो बयान आए थे, उन्होंने लगभग यह स्पष्ट कर दिया कि यह वाणिज्य मंत्री के वक्तव्य सहित हमारे लिए यह गर्व की बात थी। तो क्या भारत वास्तव में जीएसपी पर पीछे मुड़कर देख रहा है, क्या आप इसके लिए बातचीत कर रहे हैं, क्या कोई ऐसी प्रगति है जिसपर आप विस्तार से चर्चा करना चाहेंगे?

प्रश्न : कैलिफोर्निया से वापस डीसी आने पर राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि ह्यूस्टन में एक बड़ी घोषणा हो सकती है। क्या यह व्यापार से संबंधित हो सकता है या जीएसपी से संबंधित हो सकती है और यूएनजीए के साथ-साथ राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बैठक के दो उदाहरण भी हो सकते हैं?

विदेश सचिव, श्री विजय गोखले :
जहां तक परमाणु ऊर्जा का प्रश्‍न है जो बैठक ह्यूस्टन में हो रही है, वहां सभी जो प्रमुख कंपनियां है वो तेल और गैस के क्षेत्र में हैं, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में है तो इसमें मैं समझता हूं कि चर्चा नहीं होगी। जहां तक उन 6 पावर रिएक्‍टरों की बात है उस पर बातचीत चल रही है। अभी कोई तात्‍कालिक घोषणा नहीं है उसके बारे में।

हमने इन 40 कांग्रेसियों द्वारा लिखा गया पत्र देखा है। भारत की सदैव यह स्थिति रही है कि जीएसपी कुछ मानदंडों के आधार पर अन्य देशों को देशों द्वारा दिया गया एकतरफा निर्णय है। हमारा एक विकासशील देश हैं। हम उन मानदंडों को पूरा करते हैं। मुझे याद नहीं है कि हमने कभी कहा था कि जीएसपी में हमारी कोई दिलचस्पी नहीं है। मेरी याद में संयुक्त राज्य अमेरिका ने एकतरफा हमसे वह रियायत वापस ली है। इसलिए इस मामले पर हमारी स्थिति स्पष्ट है। हमें विश्वास है कि जीएसपी ऐसा कुछ है जो हमारे उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन अंततः इस पर संयुक्त राज्य अमेरिका को कार्रवाई करनी हैं। मैं उस विशेष वक्तव्य के बारे में नहीं जानता जिसके बारे में आप बात कर रहे हैं। लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प ने चूंकि यह घोषणा की है, आप इसके बारे में उनसे पूछ सकते हैं।

प्रश्न : ……. अश्रव्य ……..

विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : यह बैठक 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में हो रही है जो ह्यूस्टन में भारतीय प्रवासी समुदाय के कार्यक्रम में भाग लेने से संबंधित है।

प्रश्न : मैं समझता हूं कि अमरीका में भारत की इस स्थिति की काफी सराहना की गई है कि जम्मू और कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है। लेकिन मेरा प्रश्न विशेष रूप से राष्ट्रपति ट्रम्प के बारे में है। जी7 की बैठक के बाद भी, जहां हालात ऐसे हैं, नौ या दस दिन बाद उन्होंने फिर से कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने की पेशकश दोहराई हैं। तो मैं सिर्फ यह सोच रहा था कि क्यों यह हमारे लिए राष्ट्रपति ट्रम्प को समझाने के लिए इतना मुश्किल होता जा रहा है कि ये सभी सार्वजनिक कथन वास्तव में भारत के हित में नहीं हैं। वे वास्तव में अंत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे हित को प्रभावित करेगा।

प्रश्न : पाकिस्‍तान में बीते कुछ दिनों में जिस प्रकार से अल्‍पसंख्‍यकों को लेकर घटनाएं हुई है, कई हिंदू लड़कियों को अगवा किया गया, यातनाएं दी गई है। तो क्‍या संयुक्‍त राष्‍ट्र के मंच पर भारत उस मसलों को उठाएगा क्‍योंकि संयुक्‍त राष्‍ट्र मानव अधिकार में पाकिस्‍तान भी भारत के मामलों को उठाता है?

प्रश्न: ऐसी रिपोर्ट सामने आई है कि पाकिस्‍तान एक बड़े पैमानेपर ह्यूस्‍टन में और न्‍यूयार्क में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान विरोध करने की योजना बना रहा है, वो कुछ खालिस्‍तानी समूहों के संपर्क में भी है, तो क्‍या इस मुद्दें को हमने अमेरिका के साथ उठाया है क्‍योंकि हमने पहले भी देखा है कि यू.के. में किस तरह से भारतीय उच्‍चायोग पर हमला हुआ है?

जहां तक अल्‍पसंख्‍यकों का मुद्दा है, जब-जब ये घटनाएं होती है। भारत इस मुद्दें को उठाता है, इसको संयुक्‍त राष्‍ट्र मंच पर उठाएगें या नहीं, यह मैं अभी नहीं कह सकता आपसे लेकिन यह मामला एक मानव अधिकार संबंधित मुद्दा है।

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में भाषण मुख्‍य रूप से वैश्विक भूमिका और वैश्विक आशाओं आदि पर अधिक है। मुझे विश्वास नहीं है कि इस पर इतनी तरह के विस्तार में चर्चा होगी लेकिन यह एक ऐसा मामला है जिसे हमने बार-बार उठाया है और एक सिख युवती के जबरन धर्मांतरण से संबंधित हाल की घटनाओं पर भी हमारी आवाज सुनी गई है।

जहां तक विरोध के मुद्दे का संबंध है, हमने मीडिया में ऐसी रिपोर्टें देखी हैं। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि जो लोग इन मामलों को देखते हैं, उन्होंने अमेरिकी पक्ष के साथ इस पर चर्चा की है। मुझे विश्वास है कि उस देश में प्रचलित कानूनों के भीतर अमेरिका यह सुनिश्चित करने का ध्यान रखेगा कि इस घटना में कोई व्यवधान न हो या प्रधानमंत्री की सुरक्षा को कोई खतरा न हो।

प्रश्न : आपने उल्लेख किया कि विदेश मंत्री और राज्य मंत्री दोनों ही प्रधानमंत्री के साथ अमेरिका में होंगे और आपने यह भी कहा कि वे गुट निरपेक्ष, सीआईसीए और ब्रिक्स सदस्यों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के व्यापक स्पेक्ट्रम को भी शामिल करेंगे। एजेंडे में क्या होगा, क्या कश्मीर होगा?

प्रश्न : क्या इस्पात और एल्यूमीनियम पर 232 प्रशुल्कों में कोई प्रगति होगी और चिकित्सा उपकरणों पर क्या प्रगति होगी, हम उन रिपोर्टों को सुन रहे हैं और यह भी ट्वीट कर रहे हैं कि अमेरिकी राजदूत कुछ बैठकें कर रहे हैं?

प्रश्न : क्या हम अमेरिका के साथ ऊर्जा क्षेत्र में कुछ ठोस निर्णय की आशा कर सकते हैं जैसे कि हमने रूस के साथ क्या हस्ताक्षर किए हैं, खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा क्षेत्र में पांच वर्ष का समझौता क्‍या है?

प्रश्न : संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा सुधारों पर रुकी हुई वार्ता के बारे में क्या मौजूदा महासभा में चार साल पहले की स्थिति से इसे आगे ले जाने के लिए कोई कदम उठाया गया है?

विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : जब मैंने कहा कि तीन देशों अर्थात प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और राज्य मंत्री द्वारा कवर किए जाने वाले देशों के व्यापक स्पेक्ट्रम हैं, तो मेरा इरादा अनिवार्य रूप से यह कहना था कि ऐसे कई देश हैं जिनका समय की कमी या किसी अन्य कारण से हमारे नेतृत्व दौरा करने में सक्षम नहीं है। संयुक्त राष्ट्र एक ऐसा स्थान है जहां ये नेता प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति या विदेश मंत्री के स्तर पर एक साथ आते हैं। तो इरादा यह है कि इन तीन लोगों को आपसी हित और आपसी चिंता के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए संभवत: कई देशों को कवर किया जाएगा। स्पष्ट रूप से जो परस्पर हित है वह उस देश के आधार पर भिन्न होगा जिसके साथ हम बात कर रहे हैं।

मैं व्यापार से संबंधित विशिष्ट मुद्दों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता क्योंकि आप भारत सरकार की स्थिति यह जानते हैं कि 232 के अंतर्गत प्रशुल्क लगाना अमेरिका द्वारा एकपक्षीय कार्रवाई है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। यही हमारी स्थिति है। तो यह भी चर्चा के हिस्सा के रूप में चिकित्सा उपकरणों और दोनों पक्षों पर अन्य व्यापार के मुद्दें रहे हैं। इन पर पहले से ही सरकारी स्तर पर चर्चा की जा रही है। तो उससे परे मुझे लगता है कि वाणिज्य मंत्रालय इस संबंध में प्रश्‍नों का उत्‍तर देने के लिए उपयुक्त मंत्रालय है।

मैं नहीं समझता कि पांच वर्ष के सहयोग कार्यक्रम के संदर्भ में कोई ठोस चर्चा होगी क्योंकि यह भारत और रूस के बीच एक अंतर-सरकारी व्यवस्था थी। यह अनिवार्य रूप से एक व्यावसायिक कार्यक्रम है जिस पर अमेरिकी और अन्य विदेशी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी होगें। और प्रधानमंत्री से तेल और गैस के क्षेत्र में उपलब्ध निवेश और व्‍यापार के बारे में बात करेंगे। तो यह एक व्यापारिक कार्यक्रम है। एक ऐसा कार्यक्रम जो रूस में G2G समझौता किया गया था।

जैसा कि मैंने कहा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के बारे में मैंने कहा कि सुधारित बहुपक्षीयता के प्रधानमंत्री के एजेंडे का एक हिस्सा यह है कि सुरक्षा परिषद को वर्तमान वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए। लेकिन यह एक ऐसा दृष्टिकोण है जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र में सदस्यता की सर्वसम्मति की आवश्यकता है और निश्चित रूप से भारत अपना दावा बनाना जारी रखेगा कि हमें यह आकलन करना होगा कि क्या और किस सीमा तक संयुक्त राष्ट्र में इस मामले में कर्षण है। हालांकि, हमारी अपनी स्थिति स्पष्ट है। हम मानते हैं कि किसी भी मापदंड से, चाहे वह जनसंख्या, आकार, अर्थव्यवस्था, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में हमारी भागीदारी, सतत विकास लक्ष्यों में हमारा योगदान और इसी तरह, भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता एक उपयुक्त उम्मीदवार है।

प्रश्न : पाकिस्‍तान ने प्रधानमंत्री के उस दौरे के लिए फिर से अपना एयरस्‍पेस प्रयोग करने की अनुमति नहीं दी है। क्‍या भारतउसके अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर प्रश्‍न उठाने की सोच रहा है। अंतर्राष्‍ट्रीय विमानन संगठन आदि में।

सरकारी प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार :
हमने पहले से ही कल प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

प्रश्न : आपने कुछ समय पहले ही उल्लेख किया था कि अनुच्छेद 370 एक आंतरिक मामला है और हम संयुक्त राष्ट्र में इस पर चर्चा नहीं करेंगे। तो आप इस स्थिति के साथ बयान का समाधान कैसे कर सकते हैं जहां पाकिस्तान लगभग यह बनाने जा रहा है कि भारत को शर्मिंदा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में अपने प्रयासों का ध्यान केंद्रित किया जाए, तो आप उसके साथ कैसे सामंजस्य स्थापित कर सकते हैं?

विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : जहां तक हवाई क्षेत्र का संबंध है, यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है जहां कोई देश किसी अन्य देश के राष्ट्राध्यक्ष, सरकार के प्रमुख को उड़ान मार्ग देने से इनकार करता है। लेकिन ऐसा तब है जब देश एक सामान्य देश है। अब हमने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हम आशा करते हैं कि पाकिस्तान अपनी कार्रवाई की मूर्खता को महसूस करेगा। जहां तक किसी अंतर्राष्ट्रीय संगठन का संबंध है, हम उस पर विचार करेंगे। अभी तक ऐसा करने की हमारी कोई मंशा नहीं है लेकिन यदि वे अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन के विनियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, तो यह संभावना है कि हम निश्चित रूप से विचार कर सकते हैं।

जहां तक पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र में जो कहने जा रहा है, उसका संबंध है, वास्तव में इस पर टिप्पणी नहीं करूंगा। यदि वे अपने प्रधानमंत्री के भाषण में इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। हमारे प्रधानमंत्री इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय खंड का उद्देश्य एक महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था के रूप में, एक महत्वपूर्ण देश के रूप में, संयुक्त राष्ट्र के प्रधानमंत्री के एक जिम्मेदार सदस्य के रूप में ध्यान केंद्रित करना है जो हम किस लिए कर रहे हैं। विकास, सुरक्षा के लिए, शांति के लिए और हमारी अपेक्षाओं और अन्य देशों की आकांक्षाओं के लिए. और मैं वास्तव में इसे उस पर छोड़ना चाहता हूं।

सरकारी प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : धन्यवाद महोदय। यह प्रधानमंत्री की संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा पर विशेष ब्रीफिंग समाप्त होती है। आप सभी को शामिल होने के लिए धन्यवाद।

(समापन)



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